May 18, 2022

वक्त पर किया तो ठीक वरना पृथ्वी डिलीट

जनसंख्या विस्फोट आज मानवता के सामने बहुत बड़ी चुनौती साबित हो रही है। अपने फायदे हेतु मानव प्रकृति का विनाश करने पर उतारू है।

संरक्षण है जरूरी

हमे यह बात याद रखने की आवश्यकता है कि आज क्या हम संरक्षित करे जो कल अमूल्य होगा ? अपने बच्चो के भविष्य के लिए हम उन्हें विज्ञान, कला, वाणिज्य, और खेल आदि कि ओर प्रोत्साहित तो कर रहे हे परन्तु असल मे हम केवल वर्तमान देख रहे है न कि भविष्य ।

क्यूंकि जिस प्रकार से हम प्रकृति का ह्रास करने पर अमादा है संभव है कि निकट भविष्य में हर कोई डॉक्टर, इंजिनियर, प्रोफेसर, आर्किटेक्ट आदि हो परन्तु डॉक्टर के पास वो रसायन ही न हो जो मरीज को स्वस्थ कर सके, एक प्रोफेसर के पास पढाने हेतु कोई पुस्तक न हो, छात्रों के पास पेंसिल न हो, और बहुत हद तक संभव है स्वांस लेने हेतु स्वच्छ वायु न हो।

द समझ टीम तथा वालंटियर द्वारका आश्रम में वर्षा ऋतु के आगमन से पूर्व वृक्षारोपण 2019
थोर हमारा पशुमित्र जिसने हमारा साथ दिया मात्र 8 माह की उम्र में, उसे प्रकृति से भी उतना ही प्रेम हे जितना अन्य पशुओ को होता है

वक्त रहते हमे एक अहम् जिम्मेदारी निभानी होगी, केवल तभी हम अपने पूर्वजो से प्राप्त प्राकृतिक सम्पदा को अपनी आने वाली पीडी को सोंप सकेंगे। क्यूंकि यह सम्पदा हमे केवल देख रेख के लिए मिली हे जो हमे अपनी आने वाली पीडी को उनके आने वाली पीडी के लिए हस्तांतरण करनी है।

हमे अपने बच्चो को पर्यावरण से प्यार करना और उनके प्रति आदर भाव रखना सिखाना होगा। और यह कार्य वक्त रहते नहीं किया गया तो हो सकता है जल प्रलय की भविषवाणी सच हो जाए।

पेड़ों की देखभाल के लिए हमें सरकार पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। अपनी व्यस्त जिंदगी से निकाले गए चंद मिनट भी प्रकृति और आसपास की हरियाली में सहयोग करने के लिए पर्याप्त है।

बचपन से डालें आदत

पेड़ लगाने या बागबानी का शौक एकाएक नहीं आ सकता इसके लिए जरूरी है कि बच्चे को शुरुआत से इसके लिए तैयार किया जाए। अपने बच्चों को आज सभी लोग गर्मियों की छुट्टियों में समर कैंप भेजते हैं लेकिन एक समय ऐसा भी था जब बच्चें गांव जाते थे और वहां खेत आदि देखकर उनके मन में पेड़ों के प्रति लगाव आता था। आज बेशक आप उन्हें गांव ना ले जा सके लेकिन गर्मियों की छुट्टियों में घर में एक नया पौधा ला कर उसकी जिम्मेदारी अपने बच्चों पर डाल कर उनके दिल में पौधों के लिए जगह जरूर बना सकते हैं।

यह एक छोटी सी आदत आपके बच्चें की जिन्दगी को अच्छी दिशा प्रदान करेगी। इससे ना सिर्फ वह प्रकृति के करीब आएगा बल्कि उसमें जिम्मेदारी लेने की क्षमता भी आएगी।

अभी भी समय है संभलने का

जलवायु परिवर्तन से आज कही लोग पानी को तरस रहे है तो कही अत्यधिक वर्षा फसल ख़राब होने का कारण बन रही है। कही लोग गर्म लू से मर रहे है तो कही अत्यधिक बर्फीली हवा से मर रहे है।

ध्यान रहे 

वक्त पर किया तो ठीक वरना पृथ्वी डिलीट

नवभारत टाइम्स 18 जुलाई 2019 (ब्लॉग में प्रकाशित)

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